[99] John elia की सबसे बेहतरीन शायरियां हिंदी में | best shayari's of john elia |

आखिर कौन थे john elia?

नमस्ते दोस्तों स्वागत है आपका shayrislap. com पर दोस्तों आज हम आपके लिए लेकर आ चुके हैं एक नई और खूबसूरत शायरियोंसे भरी हुई ब्लॉग पोस्ट जिसका नाम है जॉन एलिया की शायरी दोस्तों जॉन एलिया उर्दू भाषा के जाने माने शायर, जीवनी लेखक, और दार्शनिक थे दोस्तों पाकिस्तान में लोग उनकी शायरी के इतने बड़े दीवाने थे कि वो पाकिस्तान के सबसे ज्यादा गूगल पर सर्च किये जाने वाले शायर थे दोस्तों जॉन एलिया जी की जिंदगी में कई उतार चढ़ाव आये ये हम आपको आगे बताएंगे लेकिन पहले एक नजर उनके बचपन की और भी डालते है तो दोस्तों उनका जन्म 14 दिसम्बर 1931 को अमरोहा (उत्तर प्रदेश, भारत) में हुआ था और उनका असली नाम सय्यद सिबत-ए-असगर नकवी था लेकिन लोग उन्हें उनकी शायरियोंकी दीवानगी मैं जॉन एलिया कहते थे दोस्तों उनके पिता, अल्लामा शफीक हसन एलिया साहित्य और खगोल विज्ञान के विद्वान थे और अरबी, फ़ारसी, हिब्रू और संस्कृत भाषाओं में उनका अच्छा साहित्य था।  

एक हात में सिगरेट दूसरे हात से चाय पी रहा है जॉन एलिया सिर्फ लिख नहीं रहा शायरियां जी रहां है बेतकल्लुफी से जख्म खोलकर महफ़िल में वो हर्फ़ों के धागों से अपने जख्म सी रहा है  

ek haat mein sigaret doosare haat se chaay pee raha hai jon eliya sirph likh nahin raha shaayariyaan jee rahaan hai betakalluphee se jakhm kholakar mahafil mein vo harfon ke dhaagon se apane jakhm see raha hai

जो दुनिया का सुनाई दे उसे कहते है खामोशी जो आखों में दिखाई दे उसे तूफ़ां कहते है मेरे अंदर से एक एक करके सबकुछ हो गया रुक्सत मगर एक चीज़ बाकी है जिसे ईमान कहते है 

Is image main John Elia ki anokhi shayriyan jodi gayi hai
John Elia ki sabse anokhi shayari 

हमें फसा के यहां फासलों की उलझन में जमीन जरूर कहीं आसमां से मिलती हैं

hamen phasa ke yahaan phaasalon kee ulajhan mein jameen jaroor kaheen aasamaan se milatee hain

कौन कहता हूं उम्र भर निबाह कीजिये आइए बैठिए फना कीजिये तबाह कीजिये

kaun kahata hoon umr bhar nibaah keejiye aaie baithie phana keejiye tabaah keejiye

एक नया रिश्ता पैदा क्यों करें हम बिछड़ना है तो झगड़ा क्यों करें हम

ek naya rishta paida kyon karen ham bichhadana hai to jhagada kyon karen ham

वो चाँद कहकर गया था कि आज निकलेगा तो इंतज़ार में बैठा हुआ हु शाम से में

vo chaand kahakar gaya tha ki aaj nikalega to intazaar mein baitha hua hu shaam se mein

जानिए में चला गया हूँ कहाँ में तो खुदसे गया भी नहीं  

jaanie mein chala gaya hoon kahaan mein to khudase gaya bhee nahin

क्या कहूँ जिंदगी के बारे में एक तमाशा था जिसे मैंने उम्र भर देखा 

kya kahoon jindagee ke baare mein ek tamaasha tha jise mainne umr bhar dekha

लौट जाती है उधर को भी नजर क्या कीजिये अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजिये 

laut jaatee hai udhar ko bhee najar kya keejiye ab bhee dilakash hai tera husn magar kya keejiye

दिल तमन्ना से डर गया जनाब सारा नशा उतर गया जनाब  

dil tamanna se dar gaya janaab saara nasha utar gaya janaab

में जुर्म का इतिराफ़ करके कुछ और है जो छुपा गया हु

mein jurm ka itiraaf karake kuchh aur hai jo chhupa gaya hu

साबित हुआ सुकून-ए-दिल-ओ-जान कहीं नहीं मेरे रिश्तों में ढूंढता हूं तो ढूंढा करे कोई  

saabit hua sukoon-e-dil-o-jaan kaheen nahin mere rishton mein dhoondhata hoon to dhoondha kare koee 

थक सा गया है अब मेरी चाहतों का वजूद, अब कोई अच्छा भी लगे तो इजहार नहीं करता 

thak sa gaya hai ab meree chaahaton ka vajood, ab koee achchha bhee lage to ijahaar nahin karata 

हमने गुनाह किया तो दोजख मिली हमें दोजख का क्या गुनाह की दोजख को हम मिले

Is image main john elia ki anusuni aur anokhi najm add ki hai
John Elia ki najm

दील ने वफ़ा के नाम पर कार-ए-वफ़ा नहीं किया खुदको हला कर लिया खुदको वफ़ा नहीं किया जाने तेरी नहीं के साथ कितने ही जब्र थे कि थे मैन तेरे लिहाज में तेरा कहा नहीं किया

dil ne vafa ke naam par kaar-e-vafa nahin kiya khudako hala kar liya khudako vafa nahin kiya jaane teree nahin ke saath kitane hee jabr the ki the main tere lihaaj mein tera kaha nahin kiya

कोई तालुख ही न रहें जब के सबब ही बाकी हो क्या मैं क्या मैं अब भी जिंदा हुं क्या तुम अब भी बाकी हो

ajab tha usakee diladaaree ka andaaz vo barason baad mujhase mila hai bhala mein poochhata us se to kaise bataen jaan tumhaara naam kya hai

John elia की अनसुनी शायरियां हिंदी में images के साथ 

वह अपने भाई-बहनों में सबसे छोटा थे  उनके भाई, रईस अमरोहवी और सैयद मुहम्मद ताक़ी पत्रकार और मनोविश्लेषक थे।  उनका एक भाई भी था जिसका नाम मोहम्मद अब्बास था, और एक बहन जिसका नाम सय्यदा शहीजान नजफी नकवी था।  दोस्तों जॉन साहब को बचपन से ही शायरियों,गज़लों का शौक था जब वो 8 साल के थे तब उन्होंने अपनी पहली ग़ज़ल लिखी और आगे चलते चलते उनकी शायरियोंका सिलसिला ऐसे ही चलता रहा धनु राशि में उनकी राशि है।  उन्होंने अमरोहा में दारुल उलूम सैयद उल मदारिस से फारसी और अरबी का अध्ययन किया, जो उत्तर प्रदेश में एक इस्लामिक विश्वविद्यालय, दारुल उलूम देवबंद से जुड़ा एक मदरसा था। वहां भी उन्हों कई शायरियां और गज़लें लिखीं जो कि काफी ज्यादा मशहूर भी हुई दोस्तों वैसे तो कई शायर थे हिंदुस्तान और पाकिस्तान में पर जॉन साहब का अंदाज़ सबसे अलग था वो अक्सर मुशायरे में शराब और सिगरेट पिया करते थे और जॉन एलिया शायरियां अपने महफिलों में सुनाते थे.

 दोस्तों वैसे तो वो हिंदुस्तान से बहोत मोहब्बत किया करते थे पर कुछ दिकत्तों के चलते उन्हें 1947 के बटवारे में पाकिस्तान जाना पड़ा और कराची शहर में बसना पड़ा दोस्तों  उन्होंने एक किताब भी प्रकाशित करवाई जिसका नाम था जॉन एलिया की शायरी इसमें उन्होंने कई नायाब शायरियां जोड़ी जिन्हें पढ़ने वाले लोग उनके और उनकी कलम के दिवाने हो गए उन्होंने अपने आगे की जिंदगी कराची(पाकिस्तान) में ही गुजारी दोस्तों लोग उन्हें अक्सर टूटे दिल की दवा कहते थे क्योंकि उनकी शायरियां लोगों के टूटे दिलों पर अक्सर मरहम  का काम करती थी दोस्तों उन्होंने 1970 में प्रसिद्ध कहानीकार और स्तंभकार ज़ाहिदा हिना से शादी कर ली और 1992 में दोनों का तलाक हो गया। वो जाहिदा हिना से बहोत मोहब्बत किया करते थे इसलिए उनकी शायरियों इतना दर्द होता है 

एक गली थी कि उस से हम निकले कुछ ऐसे निकले की दम निकले कुछ ए आरजू जो था उसमें जिसमें जाने तरह के गम निकले जो फिरे दरबदर यहां वो लोग अपने बाहर बहोत कम निकले जिनसे दिल का मामला होता ऐसे यहां बहोत कम ही ऐसे गम निकल आग जिस शहर में लगी जिसदिन सबसे आखिर में वहां से हम निकले जॉन ये जो वजूद है जो वजूद क्या बनेगी अगर दम निकले 

ek galee thee ki us se ham nikale kuchh aise nikale kee dam nikale kuchh e aarajoo jo tha usamen jisamen jaane tarah ke gam nikale jo phire darabadar yahaan vo log apane baahar bahot kam nikale jinase dil ka maamala hota aise yahaan bahot kam hee aise gam nikal aag jis shahar mein lagee jisadin sabase aakhir mein vahaan se ham nikale jon ye jo vajood hai jo vajood kya banegee agar dam nikale

 वो जो तामीर होने वाली थी लग गयी आग उसी इमारत मैं जिंदगी किस तरह बसर होगी दिल नही लग रहा हमारा।

John Elia urdu gazal

vo jo taameer hone vaalee thee lag gayee aag usee imaarat main jindagee kis tarah basar hogee dil nahee. lag raha hamaara

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अजब था उसकी दिलदारी का अंदाज़ वो बरसों बाद मुझसे मिला है भला में पूछता उस से तो कैसे बताएं जान तुम्हारा नाम क्या है

Is image nain john Elia ki sabse anokhi shayari ya add ki gayi hai jo ki hindi aur urdu main hai
Best john elia shayari's

वफ़ा इखलास मोहब्बत कुरबानी अब इन लफ़्ज़ों का पीछा क्यों करें हम और हमारी ही तमन्ना क्यों करो तुम और तुम्हारी ही तमन्ना क्यों करें हम 

vafa ikhalaas mohabbat kurabaanee ab in lafzon ka peechha kyon karen ham aur hamaaree hee tamanna kyon karo tum aur tumhaaree hee tamanna kyon karen ham 

हो के दुशवार जिंदगी अपनी कितनी आसान हो गयी होगी है बे गीला हूं मैं अब बहोत दिन से अब वो परेशान हो गयी होगी   

john elia sad shayari hindi mai

ho ke dushavaar jindagee apanee kitanee aasaan ho gayee hogee hai be geela hoon main ab bahot din se ab vo pareshaan ho gayee hogee

कैसे कहें कि तुझको भी हमसे है वास्ता कोई तूने तो आजतक हमसे कोई गीला नहीं किया तू भी किसी के बात में एहत-शिकन-ए-गाले बन मैने भी एक शख्स का कर्ज अदा नहीं किया

Is image main john Elia ki sad shayari hindi main jodi gayi hai
John Elia ki sad shayriyan hindi mai 

में पैग़म हार कर ये सोचता हुं यो क्या शह है जो हारी जाती हैं हर पहलू में टके की एक हसीना तेरी पुरकत हो जा रही है

mein paigam haar kar ye sochata hun yo kya shah hai jo haaree jaatee hain har pahaloo mein take kee ek haseena teree purakat ho ja rahee hai

 मेरी अक्ल होश की सब हालतें तुमने जुनूं की ढाल दी कर लिया था मैं ऐहजे करके इश्क़ तुमने फिर बाहें गलें में डाल दी

meree akl hosh kee sab haalaten tumane junoon kee dhaal dee kar liya tha main aihaje karake ishq tumane phir baahen galen mein daal dee

शर्म देहशत झिझक परेशानी ना से काम क्यों नहीं लेती आप, ओ, जी, मगर ये सब क्या है तुम मेरा नाम क्यों नहीं लेती

sharm dehashat jhijhak pareshaanee na se kaam kyon nahin letee aap, o, jee, magar ye sab kya hai tum mera naam kyon nahin letee

हालत ए हाल के सबब हालत ए हाल गयी शौक में कुछ नहीं गया शौक की जिंदगी गयी बाद भी तेरे जाने जा दिल में रहां अजीब समां याद रहीं तेरी जहां फिर तेरी याद भी नहीं एक ही स्याने हातों है और वो ये की आजतक बात न कोई कही गयी और बात न सुनी गई 

haalat e haal ke sabab haalat e haal gayee shauk mein kuchh nahin gaya shauk kee jindagee gayee baad bhee tere jaane ja dil mein rahaan ajeeb samaan yaad raheen teree jahaan phir teree yaad bhee nahin ek hee syaane haaton hai aur vo ye kee aajatak baat na koee kahee gayee aur baat na sunee gaee 

बेदिली क्या यूँही दिन गुजर जाएंगे सिर्फ जिंदा रहें हम तो मर जायेंगे ये खराब आतला ने खैरत बागता सुबह होते ही सब काम पर जाएंगे कितने दिलकश हो तुम कितना दिलज हूं मैं क्या सितम है कि हम लोग मर जायेंगे 

Is image main John Elia ki sad shayari hindi main jodi gayi hai
John Elia ki sad shayari hindi main

John elia की सबसे लोकप्रिय Emotional उर्दू नज्म

उसके बदन को हमने दिन मुद हमने सुखंन में  और फिर उसके बदन के वास्ते कबाबी सी गयी सहने ख़यारे यार में पी है बस शब्स ए शराब जब से वो चाँद न गया वो चांदनी न गयी

usake badan ko hamane din mud hamane sukhann mein  aur phir usake badan ke vaaste kabaabee see gayee sahane khayaare yaar mein pee hai bas shabs e sharaab jab se vo chaand na gaya vo chaandanee na gayee

मेरे पास जब तेरी यादें उड़कर आती है तब तेरे बदन की जुदाई बड़ी सताती है तेरे गुलाब तरसते है तेरी खुशबू को तेरी सफेद चमेली तुझे बुलाती है तेरे बगैर मेरी रूह को आखिर चैन कैसे पड़ता है मेरे बगैर तुझे रातों को आखिर नींद कैसे आती है     

mere paas jab teree yaaden udakar aatee hai tab tere badan kee judaee badee sataatee hai tere gulaab tarasate hai teree khushaboo ko teree saphed chamelee tujhe bulaatee hai tere bagair meree rooh ko aakhir chain kaise padata hai mere bagair tujhe raaton ko aakhir neend kaise aatee hai   

हादसा बनकर कोई ख्वाब बिखर जाए तो क्या हो वक्त जज़्बात को तब्दील नहीं कर सकता दूर हो जाने से ये एहसास नहीं मर सकता ये मोहब्बत है दिलों का रिश्ता ऐसा रिश्ता जो कभी सरहदों में तक्सीन नही हो सकता तू किसी और कि रातों का हसीं चाँद सही मेरे हर रंग में शामिल तू है तुझसे रोशन है मेरे ख्वाब मेरी उम्मीदें तू किसी भी राह से गुजरे पर मेरी मंज़िल सिर्फ तू है

haadasa banakar koee khvaab bikhar jae to kya ho vakt jazbaat ko tabdeel nahin kar sakata door ho jaane se ye ehasaas nahin mar sakata ye mohabbat hai dilon ka rishta aisa rishta jo kabhee sarahadon mein takseen nahee ho sakata too kisee aur ki raaton ka haseen chaand sahee mere har rang mein shaamil too hai tujhase roshan hai mere khvaab meree ummeeden too kisee bhee raah se gujare par meree manzil sirph too hai

वो है जान अब हर महफ़िल की जनाब हम भी अब घर से कब निकलते है, क्या तक्कलुफ करें अब ये कहने में जो भी खुश है हम उस से जलते है

Is image main hmne john Elia ki urdu shayariyan add ki hai hai
John Elia ki urdu shayari

है मोहब्बत हयात की लज्जत वरना कुछ लज़्ज़तें हयात नहीं क्या इजाजत है एक बात कहूँ, में वो छोड़ो कोई बात नहीं  

hai mohabbat hayaat kee lajjat varana kuchh lazzaten hayaat nahin kya ijaajat hai ek baat kahoon, mein vo chhodo koee baat nahin  

उसकी उम्मीद ए नास का हमसे मान था के आप उम्र गुजार दीजिये उम्र गुजार दी गयी 

usakee ummeed e naas ka hamase maan tha ke aap umr gujaar deejiye umr gujaar dee gayee 

चारासाज़ों की चारासाज़ी से दर्द बदनाम तो नहीं होगा, हां मुझे दवा दो मगर ये बतलादो की मुझे आराम तो नहीं होगा अब तो जिस तौर भी गुजर जाए कोई इसरार जिंदगी से नहीं उसके गम में किया अब हर किसी को माफ कोई शिकवा अब किसी से नहीं

chaaraasaazon kee chaaraasaazee se dard badanaam to nahin hoga, haan mujhe dava do magar ye batalaado kee mujhe aaraam to nahin hoga ab to jis taur bhee gujar jae koee isaraar jindagee se nahin usake gam mein kiya ab har kisee ko maaph koee shikava ab kisee se nahin

इन किताबों ने बड़ा जुल्म किया हूं मुझपर इनमें एक रम्ज़ है जिस रम्ज़ का मारा हुआ जैन इशरतें आराम नहीं पा सकता इस जिंदगी में कभी आराम नहीं पा सकता

in kitaabon ne bada julm kiya hoon mujhapar inamen ek ramz hai jis ramz ka maara hua jain isharaten aaraam nahin pa sakata is jindagee mein kabhee aaraam nahin pa sakata


वो मिले तो यह पूछना है मुझे अब भी हूं मैं तेरी यमान में क्या यूं जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या ये मुझे चैन क्यों नहीं पड़ता एक ही शख्स था जहांन में क्या 

vo mile to yah poochhana hai mujhe ab bhee hoon main teree yamaan mein kya yoon jo takata hai aasamaan ko too koee rahata hai aasamaan mein kya ye mujhe chain kyon nahin padata ek hee shakhs tha jahaann mein kya 

आज एक बात तो बताओ मुझे ये जिंदगी ख्वाब क्यों दिखाती है क्या सितम है कि अब तेरी सूरत गौर करने पर याद आती है कौन इस घर की देखभाल करें यहां तो रोज़ एक चीज़ टूट जाती है

aaj ek baat to batao mujhe ye jindagee khvaab kyon dikhaatee hai kya sitam hai ki ab teree soorat gaur karane par yaad aatee hai kaun is ghar kee dekhabhaal karen yahaan to roz ek cheez toot jaatee hai

John elia की ग़ज़ल video के साथ 

मैने पूछा था कि इजहार नहीं हो सकता दिल ने उसी वक्त पुकारा की खबरदार नहीं हो सकता जिस से पूछें तेरे बारे में हर कोई यहीं कहता है की खूबसूरत बहोत है वफादार नहीं रहता है

maine poochha tha ki ijahaar nahin ho sakata dil ne usee vakt pukaara kee khabaradaar nahin ho sakata jis se poochhen tere baare mein har koee yaheen kahata hai kee khoobasoorat bahot hai vaphaadaar nahin rahata hai

उसके मिसाल के लिए अपने कमाल के लिए हालत ए दिल थी ये खराब और खराब की गई 

usake misaal ke lie apane kamaal ke lie haalat e dil thee ye kharaab aur kharaab kee gaee 

उसकी गली से उठकर में आन पड़ा था अपने घर पे एक गली एक गली की बात थी और गली गली हो गयी

usakee galee se uthakar mein aan pada tha apane ghar pe ek galee ek galee kee baat thee aur galee galee ho gayee


gazal

ये गम क्या दिल की आदत है नही तो किसी से कोई शिकायत है, नही तो, है वो एक ख्वाब-ए-ताबीर उसको भुला देने की नियत है नहीं, तो

 किसी के बिन किसी की याद के बिन जिये जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं, हा तो कुछ दिनों से ये हालत है नहीं, तो तेरे इस हाल पर है सबको हैरत तुझे भी इसपे हैरत है नही तो  वो दरवेशी जो तरकर आगया तू ये दौलत उसकी कीमत है नहीं तो

 हुआ जो सबकुछ यही मकसुम था क्या यही सारी हकायत है नहीं, तो अज़ीयत नाक उम्मीदों से तुझको अमन पाने की हसरत है नहीं ,तो ये गम क्या दिल की आदत है नही तो किसी से कोई शिकायत है, नही तो


ye gam kya dil kee aadat hai nahee to kisee se koee shikaayat hai, nahee to, hai vo ek khvaab-e-taabeer usako bhula dene kee niyat hai nahin, to kisee ke bin kisee kee yaad ke bin jiye jaane kee himmat hai nahin to kisee soorat bhee dil lagata nahin, ha to kuchh dinon se ye haalat hai nahin, to tere is haal par hai sabako hairat tujhe bhee isape hairat hai nahee to  vo daraveshee jo tarakar aagaya too ye daulat usakee keemat hai nahin to hua jo sabakuchh yahee makasum tha kya yahee saaree hakaayat hai nahin, to azeeyat naak ummeedon se tujhako aman paane kee hasarat hai nahin ,to ye gam kya dil kee aadat hai nahee to kisee se koee shikaayat hai, nahee to

दोस्तों बहोत से शायर उन्हें अपना आदर्श माना करते है जैसे कि राणा मुन्नवर, मोहन मदन मिश्रा इत्यादि दोस्तों राणा मुन्नवर जी जॉन एलिया साहब के बहोत बड़े दीवाने थे वो जॉन एलिया की शायरियों की किताब से काफी प्रभावित थे  70 वर्ष की आयु में, शुक्रवार 8 नवंबर 2002 को कराची में tuberculosis से उनकी मृत्यु हो गई। अगर आपको हमारी यह ब्लॉग जॉन एलिया की शायरियों की ब्लॉग पोस्ट पसंद आती है तो इसे अपने दोस्तों में सांझा करना बिल्कुल न भूलें धन्यवाद.

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